ऐसे हसीनायों के हनीट्रैप में फंसते हैं अफसर

ऐसे हनीट्रैप में फंसते हैं अफसर; पहले फ्रेंड लिस्ट और फिर वॉट्सऐप में ले जाती हैं

हाल ही में एयरफोर्स ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह अरेस्ट हुए। उन पर हनीट्रैप में फंस कर पाक को जानकारी देने के आरोप लगे।
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  • कई मामलों में बिना ब्लैकमेल किए काम चल जाता है। ऑफिसर्स को पता ही नहीं होता कि उनका इस्तेमाल हो रहा है। (सिम्बॉलिक)
    नई दिल्ली.हाल ही में दिल्ली में एयरफोर्स हेडक्वार्टर से ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह को अरेस्ट किया गया। उन पर हनीट्रैप में फंस कर पाक को सीक्रेट इन्फॉर्मेशन लीक करने का आरोप है। इससे पहले भी ऐसे कई मामले पकड़ में आए हैं। मगर कई ऐसे भी रहे जिनमें कई ऑफिसर बीच में ही संभल गए। काउंटर इंटेलिजेंस से जुड़ी विंग ‘डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोलॉजिकल रिसर्च’ ऐसे मामलों का गहराई से स्टडी की और हनीट्रैप के तरीके जानने की कोशिश की। इसमें पता चला कि जिस लड़की की रिक्वेस्ट आती है वह आठ से दस म्युचुअल फ्रेंड्स वाली होती है। ये सिलसिला फेसबुक रिक्वेस्ट से शुरू होता है।

    अफसरों को ऐसे फंसाती हैं

    – इस विंग से जुड़े एक अफसर के मुताबिक, “स्टडी में यह पता चला है कि दुश्मन ने मिलिट्री ऑफिसर्स के बर्ताव की प्रोफाइलिंग कर रखी है। इससे ही तय किया जाता है कि ‘कमजोर कड़ी’ कहां है। अक्सर सिलसिला फेसबुक रिक्वेस्ट से शुरू होता है। अधिकारी या जवान के पास फेसबुक रिक्वेस्ट आती है।”

    – “दिलचस्प बात यह है कि जिस लड़की की रिक्वेस्ट आती है वह आठ से दस म्युचुअल फ्रेंड्स वाली होती है।”

    – “युवती ‘शिकार’ तक पहुंचने से पहले फ्रेंड्स में शामिल लोगों को रिक्वेस्ट भेजकर उन्हें अपनी फ्रेंड लिस्ट में शामिल कर चुकी होती है।”

    – “इसके बाद वह अपने असली ‘शिकार’ तक पहुंच बनाती है। इससे ‘शिकार’ को पूरा विश्वास हो जाता है और वे फ्रेंड रिक्वेस्ट को एक्सेप्ट लेते हैं।”

    जो फोटो क्लिक की, उसके पीछे की लोकेशन अहम

    – कई मामलों में बिना ब्लैकमेल किए काम चल जाता है। ऑफिसर्स को पता ही नहीं होता कि उनका इस्तेमाल हो रहा है।

    – एक मामले में पाया गया कि महिला ने अपने पिता का राइटर के तौर पर परिचय कराया। बताया कि वह मिलिट्री ट्रेनिंग पर किताब लिखना चाहते हैं।

    – इसके लिए उसने कुछ खास जगह फोटो क्लिक कराईं। हालांकि अफसर को शक हो गया क्योंकि हर तस्वीर के पीछे की लोकेशन ‘सेंसिटिव’ थी।

    कहा-मां बनने वाली हूं, इल्जाम तुम पर ही
    – नेवी से प्री मैच्योर रिटायरमेंट ले चुके एक ऑफिसर ने अपना एक्सपीरियंस बताया कि वह किस तरह हनीट्रैप का शिकार होने से बचे थे। युवती ने न सिर्फ उनसे बात की बल्कि मिलने के लिए बुला भी लिया।

    – 15 दिन बाद उस लड़की ने कहा कि वह मां बनने वाली है और यह इल्जाम उसी पर लगाएगी। ऑफिसर ने युवती से मेडिकल जांच के लिए आने को कहा तो उसके बाद से उसके नंबर पूरी तरह गायब हो गए।

    ऐसी महिलाओं को कहा जाता है स्लीपर शार्क

    – मिलिट्री इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट के एक ऑफिसर ने बताया कि ऐसी महिलाओं को शार्क नाम से बुलाते हैं। यह शिकार की फ्रेंड लिस्ट में तीन से पांच महीने तक स्लिपर मोड में रहती है। सभी गतिविधियों, फ्रेंड्स के आपसी कमेंट्स, फोटो अपलोड पर बारीक निगाह रखती है।

    – इस खामोशी की बाद वह पिक्चर्स पर ‘लाइक’ करने से शुरुआत करती है। कमेंट्स के कॉलम में स्माइली से शुरू करते हुए धीरे से कदम रखा जाता है। अक्सर दूसरों के कमेंट्स पर अपने कमेंट्स से शिकार की बात का समर्थन भी करती है।

    – फिर बातचीत शुरू होने के बाद युवती कुछ समय के लिए गायब हो जाती है। फिर कुछ मैसेज अनजान बनकर किए जाते हैं। बातचीत के तार एक्टिव होते ही युवती मोबाइल नंबर बहुत जिद के बाद शेयर कर लेती है। फिर फेसबुक पर उस शिकार के साथ नाता लगभग तोड़े रहती है।

    महिलाएं खुद को बताती है विडो

    स्टडी में पता चला कि कुछ केस में महिलाओं ने खुद को विडो बताया। तो कुछ में पति को अशक्त, कमजोर या सनकी के तौर पर पेश किया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि सामने वाले को लगे कि युवती को आसानी से फंसाया जा सकता है।

    महिलाओं की होती है अट्रैक्टिव फेसबुक वॉल
    हनीट्रैप में फांसने वाली महिलाओं की प्रोफाइल बेहद प्रोफेशनल ढंग से तैयार होती है। फोटो, प्रोफाइल पिक्चर, परिचय, काम, उम्र, यहां तक की दोस्तों की लिस्ट बेहद सधे तरीके से तैयार की जाती है। इसे देखकर पता नहीं चल सकता कि प्रोफाइल फर्जी है।

    ये भी हनीट्रैप में फंस चुके

    – पाटन कुमार पोद्दार के मुताबिक, 40 साल पोद्दार सूबेदार पोस्ट पर थे। अनुष्का नाम की लड़की से दोस्ती के बाद आंध्र प्रदेश की सिकंदराबाद छावनी की सूचनाएं लीक कराई।

    – रंजीत केके के मुताबिक, भटिंडा एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात रंजीत केके दामिनी मैकनॉट के संपर्क में आकर सूचनाएं लीक करने में बर्खास्त।
    – सुनीत कुमार के 2014 में सेना के मेरठ कैंट में तैनात सुनीत कुमार फेसबुक से आईएसआई एजेंट पूनम प्रकाश और रिया के संपर्क में आया। बाद में अरेस्ट।
    – कमांडर सुखजिंदर के मुताबिक नौसेना अफसर एयरक्राफ्ट कैरियर एडमिरल गोर्शकोव की खरीदारी वाली टीम में थे। रूस में हनीट्रैप में फंस गए थे।

    सेना के अधिकारियों के लिए निर्देश- क्या करें, क्या नहीं

    – आधिकारिक कंप्यूटर में बाहरी पैन ड्राइव लगाना सख्त मना।

    – फिशिंग मेल की आशंका से अनजान ईमेल खोलने की मनाही।
    – सरकारी पते के ईमेल खोलने से पहले भी सतर्कता के निर्देश।
    – नेवी की एडवाइजरी में लिखा है- पॉलिटिकल कमेंट न करें।

    40 से ज्यादा एेप्स हटाए
    सेना ने डेटा फिशिंग की आशंका के चलते 40 से ज्यादा ऐप्स ऑफिसर्स और जवानों के मोबाइलों से हटाए हैं। कई एैप का ताल्लुक चीन से पाया गया है। इनमें मी-वीडियो, क्यूक्यू लॉन्चर, मी-स्टोर, मी-कॉल जैसे एेप शामिल हैं।

    पीस लोकेशंस में ज्यादा केस
    – ले. जनरल (रि.) एसएल नरसिम्हन के मुताबिक, हनीट्रैप के मामले ज्यादातर सेनाओं की पीस लोकेशंस पर सामने आ रहे हैं। ऐसी जगह अफसरों और जवानों में सिविलियंस के बीच की आदतें, व्यवहार और खुलापन होने की प्रवृत्ति आती जाती है। वे सोशल मीडिया पर ज्यादा रहते हैं।

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