6 December, 2017 15:56

हर माह हवस का शिकार होती हैं 3 मासूम, पंजाब में पास हो मध्य प्रदेश जैसा विधेयक

महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने सोमवार को महिला सुरक्षा दंड विधि विधेयक 2017 को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद इस विधेयक को कानून का रूप दे दिया जाएगा। इस विधेयक में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म पर फांसी की सजा का प्रावधान है।

दूसरी तरफ पंजाब में बच्चियों की सुरक्षा पर बात की जाए तो प्रदेश में स्थिति कुछ ठीक नहीं है। एक अध्ययन के मुताबिक पंजाब में हर महीने 3 बच्चियों से दुष्कर्म के मामले सामने आते हैं। वहीं कई जगह तो दुष्कर्म के बाद हत्या जैसे संगीन मामले भी सामने आए हैं। यह स्थिति तब है जब पंजाब में 24.3 प्रतिशत केसों में दोषियों को सजाएं हुई हैं। पंजाब भर में महिला संगठनों व गण्यमान्य लोगों से की गई बात में सामने आया है कि प्रदेश की जनता भी सरकार से ऐसे कानून की आशा रखती है। लोगों का कहना है कि जब मध्य प्रदेश सरकार ऐसा विधेयक ला सकती है तो पंजाब सरकार क्यों नहीं। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लिए गए फैसले के संबंध में जब पंजाब प्रदेश महिला आयोग की चेयरपर्सन परमजीत कौर लांड्रा से बात की गई तो उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि निश्चय ही ऐसा कानून बनने से दुष्कर्म के मामलों में कमी आएगी।

2016 में 838 केस दर्ज हुए दुष्कर्म के जिनमें 36 बच्चियां थीं
पंजाब में 2016 के दौरान महिलाओं के साथ दुष्कर्म के 838 मामले सामने आए हैं, जबकि 2015 में यह संख्या 886 थी। इसी तरह सामूहिक दुष्कर्म के मामलों की संख्या में भी बढ़ौतरी हुई है। यदि 12 साल से छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म की बात की जाए तो 2015 के दौरान 12 साल से कम उम्र की 33 के करीब बच्चियां दुष्कर्म की शिकार हुई थीं जबकि 2016 में इनकी संख्या बढ़कर 36 हो गई।

कई केसों में सामने आते हैं पारिवारिक मैंबरों के नाम
दुष्कर्म के मामलों पर अध्ययन बताते हैं कि ज्यादातर केसों में पारिवारिक मैंबरों के शामिल होने की बात सामने आती है। अध्ययन के अनुसार 71 प्रतिशत तक केस ऐसे निकलते हैं जिनमें कहीं न कहीं कोई रिश्तेदारी सामने आती है। कहीं पर सौतेले पिता का दुष्कर्मी के रूप में चेहरा सामने आता है तो कहीं पर चाचा, मामा का नाम केस में शामिल होता है। वहीं कई मामले रंजिशन भी होते हैं। रंजिशन हुए दुष्कर्म में कई केस दुष्कर्म के बाद हत्या के निकलते हैं।

अपराध का ग्राफ नीचे आएगा: आई.जी. बार्डर रेंज सुरेन्द्रपाल सिंह
: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं से जुड़े दंड विधि विधेयक 2017 में 12 वर्ष से कम आयु की बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामले में फांसी की सजा का प्रावधान किए जाने संबंधी आई.जी. बार्डर रेंज सुरेन्द्रपाल सिंह परमार से उनकी प्रतिक्रिया जानी गई।

उन्होंने कहा कि कानून बनाने का प्रावधान देश की संसद के पास है जिसे सख्ती से लागू करवाने की जिम्मेदारी पुलिस की है। महिलाओं से जुड़े अपराधों में कई पहलुओं की जांच के उपरांत इसकी रिपोर्ट बनाना जरूरी है, जिसमें विटनैस प्रोटैक्शन व मैडीकल जांच के साथ-साथ पारदर्शिता से पूरे मामले की रिपोर्ट बनाई जाए ताकि अपराधी किसी भी तरह बच न पाए। कई बार तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर बनाई रिपोर्ट का फायदा अपराधी उठा जाते हैं, जिस कारण पीड़िता को न्याय नहीं मिलता। अगर भारतीय दंडावली की धाराओं में दिए गए सजा के प्रावधान अनुसार हर अपराधी को दंड मिले तो अपराधों का ग्राफ खुद ही नीचे आ जाएगा। विडंबना यह है कि अपराधी को कानून के अनुसार दंड न मिलना ही कानून की लचरता को दिखाता है जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाना चाहिए : आई.जी. राय
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पारित विधेयक पर आई.जी. पटियाला रेंज ए.एस. राय का कहना है कि पंजाब पुलिस प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर हमेशा ही सचेत रही है।
कानून बनाना सरकारों का काम है, वहीं पुलिस का काम कानून को लागू करना और फैसला सुनाना न्यायपालिका का काम है। किसी भी घिनौनी वारदात को रोकने के लिए कानून सख्त होना जरूरी है, इसका मैं समर्थन करता हूं परंतु जहां तक पंजाब में महिलाओं के क्राइम रेट का सवाल है पंजाब पुलिस पूरी तरह अलर्ट है और महिलाओं पर होने वाले जुल्मों खास तौर पर छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं वाले केसों में तो पंजाब पुलिस पूरी सख्ती से कानून को लागू करती है। पंजाब में मुख्यमंत्री कै. अमरेन्द्र सिंह द्वारा स्पष्ट निर्देश हैं कि आपराधिक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति को किसी भी कीमत पर न बख्शा जाए चाहे वह नशा तस्कर हो या फिर महिलाओं पर जुल्म करने वाला या फिर दुष्कर्म जैसी घिनौनी घटनाओं को अंजाम देने वाला हो।

बच्ची कोई भी हो दुष्कर्म का नाम सुनते ही आदमी का खून खौल जाता है। मध्य प्रदेश सरकार ने 12 साल की बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए जाने पर फांसी की सजा बारे जो विधेयक बनाया है, स्वागत योग्य है। इससे ऐसा घिनौना अपराध करने वाले के मन में डर बैठेगा। इस पर किसी भी प्रकार की नुक्ताचीनी नहीं होनी चाहिए। ऐसा कानून बनने से यदि किसी को सजा मिलती है तो इससे बच्चियों के प्रति गलत नजरिया भी बदलेगा और साथ में अपराध के ग्राफ में गिरावट भी आएगी।
Mamta Singh
Chief beuro up

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