अतीक के परिवार का काला चिट्ठा: पांच में से चार बेटों का घोर आपराधिक रिकॉर्ड, आबान पर भी दर्ज थी इस मामले में एफआईआर

भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 के तहत अबान, उसके साथी हमजा और कुछ अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। एक शादी समारोह में गए अबान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था।
उस वीडियो के संवाद थे, “सामने वाले को हमसे क्या मिलेगा, ये उसकी औकात बताएगी। हम दिल भी रखते हैं और असलहा भी। हम कुत्तों की तरह पीछे से वार नहीं करते, सामने से फाड़ते हैं। तूफान और हम जब भी आते हैं, मां कसम फाड़ के जाते हैं।” पुलिस ने इस वीडियो को धमकी मानते हुए एफआईआर दर्ज की थी। आबान अतीक अहमद का सबसे छोटा बेटा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अतीक अहमद के दोनों छोटे बेटों अहजम और आबान को बुआ की हिरासत में दे दिया गया था। ये दोनों प्रयागराज में अपनी बुआ के पास रह रहे थे।
उत्तर प्रदेश में कई गैंगस्टर हुए जिन्होंने वर्षों तक अपने खौफ के दम पर किसी राजा की तरह शासन किया। दबंगई से बाहुबली का तमगा हासिल कर वे सफेदपोश भी बने। अतीक अहमद ऐसा ही एक कुख्यात डॉन था। उसने कम उम्र में ही अपराध की काली दुनिया में अपनी जगह बना ली थी। 16 अप्रैल 2023 को अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ की प्रयागराज में अस्पताल के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यूपी के झांसी जिले में माफिया अतीक अहमद के एक और बेटे की मौत हो गई। हादसे में सबसे छोटे बेटे ने दम तोड़ दिया। आइए जानते हैं अतीक अहमद के परिवार का काला चिट्ठा। पांच में से चार बेटों पर मुकदमे दर्ज हैं।
अतीक अहमद का जन्म 10 अगस्त 1962 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के चाकिया मोहल्ला में हुआ था। उनके पिता फिरोज अहमद तांगा चलाकर परिवार का गुजारा करते थे। अतीक पास के एक स्कूल में पढ़ने लगे थे। 10वीं कक्षा में वह फेल हो गए थे। इसी दौरान वह इलाके के कई बदमाशों की संगत में आ गए। जल्दी अमीर बनने के लिए उन्होंने लूट, अपहरण और रंगदारी वसूलने जैसी वारदात को अंजाम देना शुरू कर दिया। 1997 में उन पर हत्या का पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। उस समय इलाहाबाद के पुराने शहर में चांद बाबा का खौफ था। चांद बाबा इलाहाबाद का बड़ा गुंडा माना जाता था। आम जनता, पुलिस और राजनेता सभी चांद बाबा से परेशान थे। अतीक अहमद ने इस स्थिति का फायदा उठाया। पुलिस और नेताओं से सांठगांठ करके वह कुछ ही वर्षों में चांद बाबा से भी बड़ा बदमाश बन गया। जिस पुलिस ने अतीक को शह दी थी, वही बाद में उसकी आंख की किरकिरी बन गई।
उसे इन सबसे बचने का सबसे आसान तरीका राजनीति लगा। 1989 में उसने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर इलाहाबाद पश्चिमी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राजनीति की शुरुआत करने के बाद अतीक समाजवादी पार्टी में शामिल हुआ। बाद में वह अपना दल में आ गया। अतीक पांच बार विधायक और एक बार फूलपुर से सांसद रहा।
बेटों का आपराधिक रिकॉर्ड
अतीक अहमद ने 1996 में शाइस्ता परवीन से निकाह किया था। उनके पांच बेटे हैं: मोहम्मद उमर, मोहम्मद अली और तीन नाबालिग बेटे। उनके पांच में से चार बेटों का भी आपराधिक रिकॉर्ड है। दो बेटे, मोहम्मद उमर और मोहम्मद अली, वर्तमान में झांसी जेल में बंद हैं। दो बेटे, मोहम्मद अहजम और मोहम्मद आबान, बुआ के घर रह रहे थे। आबान पर भी एक मुकदमा दर्ज था।
मोहम्मद उमर पर 2 लाख रुपये का इनाम था और रंगदारी का आरोप है। अगस्त 2025 में उसने सीबीआई के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। मोहम्मद अली पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है। अतीक का तीसरा बेटा असद पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। असद ने अपने साथियों के साथ उमेश पाल हत्याकांड को अंजाम दिया था।
अबान पर दर्ज मुकदमा
माफिया अतीक अहमद के छोटे बेटे आबान अहमद के खिलाफ 28 नवंबर 2025 को धूमनगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। माफिया के बेटे पर यह पहली प्राथमिकी थी। धूमनगंज पुलिस ने सोशल मीडिया पर चल रहे उसके रील का संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की थी। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर भड़काऊ रील डालकर दहशत फैलाने की कोशिश की गई थी। भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 के तहत अबान, उसके साथी हमजा और कुछ अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। एक शादी समारोह में गए अबान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था।
उस वीडियो के संवाद थे, “सामने वाले को हमसे क्या मिलेगा, ये उसकी औकात बताएगी। हम दिल भी रखते हैं और असलहा भी। हम कुत्तों की तरह पीछे से वार नहीं करते, सामने से फाड़ते हैं। तूफान और हम जब भी आते हैं, मां कसम फाड़ के जाते हैं।” पुलिस ने इस वीडियो को धमकी मानते हुए एफआईआर दर्ज की थी। आबान अतीक अहमद का सबसे छोटा बेटा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अतीक अहमद के दोनों छोटे बेटों अहजम और आबान को बुआ की हिरासत में दे दिया गया था। ये दोनों प्रयागराज में अपनी बुआ के पास रह रहे थे।
शाइस्ता परवीन का राजनीतिक सफर
साल 2023 में अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुई थी। उनके अलावा, बेटे अहजम अहमद ने भी बसपा की सदस्यता ली थी। चर्चा थी कि बसपा उन्हें प्रयागराज मेयर पद का प्रत्याशी बना सकती थी। लेकिन उमेश पाल की हत्या के बाद पार्टी ने अपने कदम पीछे खींच लिए थे। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले शाइस्ता परवीन ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ज्वाइन की थी। खुद ओवैसी ने लखनऊ में उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। इसके बाद उन्हें चुनाव में उम्मीदवार भी बनाया गया था। हालांकि, उन्होंने चुनाव लड़ने से इन्कार कर दिया था।
अशरफ का आपराधिक और राजनीतिक सफर
2004 के आम चुनाव में फूलपुर से समाजवादी पार्टी के टिकट पर अतीक अहमद ने लोकसभा चुनाव जीता था। वह सांसद बनकर दिल्ली आ गए थे। इसके बाद इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट खाली हो गई थी। इस सीट पर हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने अतीक के छोटे भाई अशरफ को टिकट दिया था। लेकिन बहुजन समाज पार्टी ने उसके सामने राजू पाल को खड़ा किया था। उस उपचुनाव में बसपा प्रत्याशी राजू पाल ने अतीक अहमद के भाई अशरफ को हरा दिया था।
इस हार को अशरफ ही नहीं, बल्कि अतीक भी पचा नहीं पाया था। उपचुनाव में जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने राजू पाल की कुछ महीने बाद ही 25 जनवरी 2005 को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में देवी पाल और संदीप यादव की भी मौत हुई थी। दो अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस हत्याकांड में सीधे तौर पर सांसद अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ का कनेक्शन सामने आया था। वर्तमान में अशरफ बरेली जेल में बंद था।